अग्निपथ : एक नया अध्याय


तू न रुकेगा कभी, 
तू  न झुकेगा कभी, 
तू न मुड़ेगा कभी, 
कर शपथ, कर शपथ,
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ।

काल को कर के पीछे,
स्व-स्वप्न को खून से सींचे,
अंतः अँधियारे को कर के पीछे,
मशाल उजाले की लिए,
कर शपथ, कर शपथ,
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ।    

पर्वत से कठोर होकर,
फूल सा कोमल होकर,
सपनों को सच में बोकर,
कर शपथ, कर शपथ,
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ।

तू न होगा दिग्भ्रमित,
तू बन जा अमित,
स्वप्न तेरा होगा फलित,
कर शपथ, कर शपथ,
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ।   

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