हाँ, मैं एक कवि हूँ
स्वर्ण-शब्दों से रवि हूँ
शब्दों का बुनता हूँ दलदल,
जैसे उमड़े हों काले बादल,
गाने की जैसे कोई लय-ताल,
फैला है यहाँ शब्दों का जाल।
हाँ, मैं एक कवि हूँ
स्वर्ण-शब्दों से रवि हूँ
भावों का है ये जंजाल,
समा जाते हैं सब काल,
यूँ तो स्वयं महान इंसान नहीं,
हूँ मैं कवि समझना आसान नहीं।
हाँ, मैं एक कवि हूँ
स्वर्ण-शब्दों से रवि हूँ...
