कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है

कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है, 
फिर जाने मुझे क्या हो जाता है?

'ज्ञान', अगर ज़िन्दगी का आधार है,
तो क्यूँ इंसान नींव हिलाता है?

'माँ', अगर, ज़िन्दगी की राह है,
तो क्यूँ इंसान डगमगा जाता है?

'पिता', अगर ज़िन्दगी के मार्गदर्शक हैं,
तो क्यूँ इंसान भटक जाता है?

'गुरु', अगर ज़िन्दगी में मार्ग-संगी हैं,
तो क्यूँ इंसान भूल जाता है?

कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है, 
फिर जाने मुझे क्या हो जाता है?

'विश्वास', अगर ज़िन्दगी की डोर है,
तो क्यूँ इंसान धोखा खाता है?

'रिश्ते', अगर ज़िन्दगी के धागे हैं,
तो क्यूँ इंसान दीवार बन जाता है?

'प्रेम', अगर ज़िन्दगी का सार है, 
तो क्यूँ इंसान बैरी हो जाता है?

'वर्तमान', अगर ज़िन्दगी का मूल है,
तो क्यूँ इंसान भविष्य बनाता है?

कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है, 
फिर जाने मुझे क्या हो जाता है?

'धन', अगर ज़िन्दगी में मनु-मैल है,
तो क्यूँ इंसान झुकता जाता है?

'मोह', अगर ज़िन्दगी में माया है,
तो क्यूँ इंसान अँधा हो जाता है?

'क्रोध' अगर ज़िन्दगी में ज्वाला है,
तो क्यूँ इंसान, इंसान को जलाता है?

'लोभ', अगर ज़िन्दगी में कड़वाहट है,
तो क्यूँ इंसान ज़हर पीता है?

कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है, 
फिर जाने मुझे क्या हो जाता है?

'त्याग', अगर ज़िन्दगी की मिठास है,
तो क्यूँ इंसान नहीं कर पाता है?

'दान', अगर ज़िंदगी की भलाई है,
तो क्यूँ इंसान अहंकारी हो जाता है?

'इज़्ज़त', अगर ज़िन्दगी की कमाई है,
तो क्यूँ इंसान इसे गंवा देता है? 

'मौत', अगर ज़िन्दगी की सच्चाई है,
तो क्यूँ इंसान जीता चला जाता है? 






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