खुदा की ओर इबादतों में झुकाता है,
सजदे में जब जब जब झुकता है ये नाचीज़,
क्यूँ मेरा खुदा मुझको याद आता है...???
कहते हैं आसमान फ़रिश्तों का है,
कहते हैं ज़मीन परवानों की है,
खुदा के तो सिर्फ बंदे हैं हम,
क्यों मेरी आशिकी खुदा हो जाती है...???
ये आसमान भी तुझपर फ़ना है,
ये ज़मीन भी तुझपर फ़ना है,
हम खुद भी तुझपर हुए फ़ना,
क्यूँ जान-ए-मन ये इश्क़ ही फ़ना है...???
